बीता हुआ वक़्त फिर एक संयोग से

 


बीता हुआ वक़्त

फिर  एक संयोग से





रात का समय और एक लड़की जो अपने बेड पर सो रही थी थोड़ी देर में वो एकदम अजीब सा महसूस कर रही थी मानो कोई पास है




लेकिन जैसे ही उसने अपनी आँखें खोली सब कुछ नार्मल, कोई भी नहीं था | वो बहुत ज्यादा कंफ्यूज थी आखिर वो अजीब सा एहसास क्या था?उसे लगा की शायद कोई वहम था या फिर कोई नाईटमेयर लेकिन बहुत अजीब सा था ऐसा लगा जैसे ये सच था फिर सोचने लगी, सच कैसे हो सकता है कोई तो नहीं है यहाँ



दरअसल इस लड़की का नाम सलोनी है और वो एक फिल्म डायरेक्टर है अभी थोड़ी ही देर में वो शूटिंग में जाने के लिए तैयार होकर जाने वाली ही थी




तभी फ़ोन की रिंग बजी और ये फ़ोन प्रोडूसर  आकाश वर्मा की थी  सलोनी फ़ोन उठाते हुएवहां से एक आवाज़ आयी जो आकाश की थी

आकाश वर्मा  - यार आज शूटिंग कैंसिल करना पड़ेगा मौसम कुछ ठीक नहीं है यहाँ, हम कल शूट करेंगे




 सलोनी  -  ठीक है( फ़ोन रखते हुए)  आज आराम करने का टाइम मिल गया एक काम करती हूँ कहीं बाहर घूमकर आती हूँ

 जैसे ही वो जाने के लिए दरवाज़ा खोलती है बहुत तेज़ आंधी आ जाती है

सलोनी  – अरे ये क्या ... मुझे अंदर रहना चाहिए मौसम सच में बहुत खराब है


दरवाज़ा बंद करके सलोनी पास्ता बनाने किचन में जाती है मगर पास्ता बनाते वक़्त भी उसे ऐसा ही लगता है जैसे कोई उसके पीछे खड़ा है 



लेकिन  जब वो मुड़ती है तब कोई नहीं,  थोड़ी देर में पास्ता बनाने के बाद वो पास्ता खाती है

फिर स्टीमबाथ लेती है  शायद इससे स्ट्रेस में आराम मिलेगा


और वहां भी उसे किसी के होने का एहसास होता है मगर बिना किसी रिएक्शन के वो बेड  पर आ जाती है और थोड़ी ही देर में उसे नींद आ जाती है और आज फिर से वही एहसास मानो कोई उसके करीब था  वो आज उसे महसूस कर रही थी मगर गहरी नींद के कारण वो कुछ भी समझ नहीं पा रही थी  और सारी रात वो शख्स जो की नहीं था वो उसके साथ होने का एहसास दे रहा था

सुबह होने पर उसे कोई नहीं दिखा  और ना ही कोई था  इस बार उसे लगा की ज़रूर साइकियाट्रिक के पास जाना होगा कोई mental issue लग रहा है ऐसा सोचती हुई वो आज शूटिंग पर जाने की तैयारी कर रही होती है तभी फिर से प्रोडूसर का फ़ोन आता है और आज भी मौसम सही नहीं है  शूटिंग आज भी postponed का कहकर फ़ोन रख देते है और मौसम खराब होने की वजह से वो साइकियाट्रिक के पास भी नहीं जा पाती है 

 

सलोनी - ये मौसम को क्या हो जाता है बाहर का खराब मौसम देखते हुए ...

खुद से कहती हुई और कल की तरह वो खाना और  शावर लेकर आराम  करने के लिए बेड  पर जाती है और आज भी वैसे ही कुछ अजीब सा एहसास होता है  जैसे ही वो गहरी नींद में जाती है कोई आता है और  उसके साथ होने का एहसास दे जाता है  , रात भर सलोनी उसे देखने की कोशिश नींद में करती है मगर ना तो वो अपनी आँखें खोल पाती है ना ही उस शख्स से खुद को दूर कर पाती  है इसी तरह पुरे 7 दिन यानी एक सप्ताह  हो गया मगर सलोनी कुछ समझ नहीं पा रही थी कि आखिर उसे हो क्या गया है अभी तो वो रेस्ट भी कर रही है तो स्ट्रेस भी नहीं है फिर ये कैसा एहसास है जो सच ना होकर भी सच लग रहा है  इस बार सलोनी ने फिर से साइकियाट्रिक के पास जाने का सोचा तभी फ़ोन की रिंग बजी और प्रोडूसर आकाश का फ़ोन आता है


आकाश  - आज शूटिंग है डायरेक्टर साहिबा कहाँ है आप?

सलोनी- अभी आती हूँ

सलोनी शूटिंग साइट पर पहुँचती है और इतने दिन शूटिंग ना हो पाने की वजह से आज बहुत देर तक शूट चला और रात के 3 बज चुके थे| इसलिए सबको बहुत ज्यादा नींद आ रही थी सबने रात का खाना लेकर वही पर सो गए | कोई सोफे पर, कोई चेयर पे, कोई ज़मीन पर


और इस तरह सुबह के 7 बज गए और सभी उठ गए, सलोनी की भी सबकी आवाज़ सुनकर नींद खुल गयी| 


फिर वो जब अपने कॉटेज  में जाने के लिए अपनी कार में बैठी


 
तभी उसे एकदम एक ख्याल आया कि कल वो पुरे दिन शूट पर थी और वही सो गयी ज्यादा थकी थी मगर नींद भी उसने कम लिया तो फिर वो नाईटमेयर उसे क्यों नहीं आये वो एहसास क्यों नहीं हुआ अब वो समझ चुकी थी की ब्रेन में कोई इशू नहीं है ये कुछ और है वो बाहर से सिर्फ शूटिंग के लिए यहाँ आयी है और उसने शूटिंग खत्म होने तक रहने के लिए ही कॉटेज लिया था क्या कॉटेज में कुछ प्रॉब्लम है  ऐसा वो सोचती है मगर कन्फर्म नहीं था फिलहाल वो कॉटेज  में जाती है और shower लेकर अपने लिए कॉफ़ी बनाकर पीती है
 

अपने आप से कहती हुई “उफ़ आज शूटिंग नहीं है आराम करती हूँ और लेटते ही कब गहरी नींद में चली गयी पता ही नहीं चला 


और फिर से वही शख्स सलोनी के पास आकर बैठता है अगली सुबह सलोनी की आँख खुलती है तब वो बहुत खुश होती है पर ये ख़ुशी का एहसास क्यों है वो समझ नहीं पाती मगर उसे धुँधला सा याद आता है  कोई कल रात फिर उसके पास आकर बैठा था इस बार सलोनी को विश्वास हो गया कि ये कोई वहम नहीं है ज़रूर ऐसा कुछ है यहाँ,  ‘’जो अजीब सा, या करीब सा है’’ काश वो ये जान पाती क्यूंकि उसे याद है जब वो छोटी थी तब उसकी दादी माँ हमेशा ऊपरी शक्ति के बारे में कहा करती थी की अगर वो आपको नुक्सान नहीं पंहुचा रहे है तो वो शायद आपकी दोस्त हो सकती है या आपका कोई क़रीबी, तभी सलोनी की नज़र एक कपबोर्ड पर पड़ती है जो ऊपर की तरफ था  वैसे तो ये कपबोर्ड सलोनी ने पहले भी देखा था मगर आज उसे ये काफी आकर्षक लग रहा था मानो कोई उसे खोलने के लिए कह रहा हो

 सलोनी- ये ऊपर कपबोर्ड में क्या रखा है


वो उस कपबोर्ड को खोलती है तब उसमे बहुत सारी चीज़े रखी हुई थी सबसे ज्यादा कपल की गिफ्ट्स टॉयज कुछ स्पेशल फ्रेम्स जो रोमांटिक मूड क्रिएट करते है|  सलोनी अपने आप से, 


सलोनी - कमाल है  मुस्कुराते हुए , सारा कुछ रोमांटिक थीम वाले सामान है, लगता है ये किसी कपल का कॉटेज होगा

और तभी सलोनी की नज़र एक पुराने फोटो की फ्रेम पर पड़ती है जो काफी पुराणी लगती है मगर वो फोटो फ्रेम काफी एलेगेंट लग रहा था इतना सुन्दर फोटो देखकर सलोनी खुद को रोक नहीं पायी और उसने उसे अपने हाथ में ले लिया और अच्छे से उसे देखने लगी तभी सलोनी की आँखें एकदम बड़ी हो गयी मानो वो सुन्न हो गयी और फिर थोड़ी देर में वो ज़मीन पर बैठ जाती है उसके आँखों में आंसू बह रहे थे ऐसा लग रहा था उसे कुछ याद आ गया था



 
फिर  फ़्लैश बैक में 25 साल पहले……………………………………

 सुहान- अपनी वाइफ को बेहद करीब करते हुए , ‘’I can’t live without you मैं तो मर कर भी चैन से नहीं रह पाउँगा अगर तुम पास ना हो तो’’

 

रूही- मुस्कुराते हुए I love you my dear husband



दोनों एक दूसरे के साथ बेहद खुश थे| सुहान एक राइटिंग सेण्टर का ओनर था और काफी अमीर था

 


रूही को वो बेहद चाहता था रूही भी सुहान के बिना एक पल नहीं रह पाती थी दोनों काफी रोमांटिक कपल थे इस तरह शादी के पुरे 1 साल होने को आया था  2 दिन बाद उनकी मैरिज एनिवर्सरी है सुबह ऑफिस से एक कॉल आता है और बुक्स पब्लिश के लिए कुछ मीटिंग्स है तो सुहान अपनी वाइफ को रोमांटिक अंदाज़ से अभी निकलना होगा माय स्वीट, लेकिन तुम लंच बॉक्स लेकर आना हम दोनों ऑफिस में ही साथ में खाना खाएंगे और रूही भी हाँ में अपना सर हिलाकर मुस्कुराते हुए किचन में चली जाती है 


और सुहान ऑफिस के लिए अपनी कार में बैठकर निकल जाता है


ऑफिस में मीटिंग  अटेंड करते है


 
और मीटिंग कम्पलीट होने के बाद सुहान अपनी चेयर पर आराम से बैठे थे और कुछ पेपर्स देख रहे थे 



तभी उसकी ऑफिस असिस्टेंट वामिका चड्डा वहाँ उस रूम में आ जाती है और सुहान के ऊपर जानबूझकर गिर जाती है और ज़बरदस्ती सुहान को गले मिलने की कोशिश करती है तभी सुहान गुस्से में 



सुहान -  ये क्या बतमीज़ी है  इस बतमीज़ी के लिए मैं  तुम्हे यहाँ से निकाल सकता हूँ

वामिका चड्डा- आप ऐसा नहीं कर सकते. और वो गुस्से में कहती है आपको भी मुझसे प्यार करना पड़ेगा वरना फिर मैं आपकी लाइफ बेकार कर दूंगी

सुहान - शट -उप निकल जाओ अभी |

ऐसा कहकर सुहान उसे अपने कमरे से बाहर धक्के मारकर  निकाल देता है  

सुहान – और कल से यहाँ आने की ज़रूरत नहीं है

 

वामिका चड्डा गुस्से में वहां से जाती है  तभी सामने से रूही (सुहान की पत्नी) सब कुछ सुन रही होती है और उसकी आँखों में आंसू थे की कोई औरत उसके पति से ऐसे बात कर रही है वो भी बिना किसी गलती के, वामिका चड्डा रूही को घूर कर देखती है फिर वहाँ से चली जाती है

 

रूही - सुहान के रूम में आते हुए,  its okhay आप चिंता मत कीजिये

सुहान -  मुझे किस बात की चिंता

और रूही को अपनी बाँहों में लेकर और उसे किस करते हुए , चलो हम लंच कर लेते है


 
दोनों  लंच करते है और दोनों एक दुसरे देखते  और मुस्कुराते हुए अपना लंच करके वापिस घर पर जाते है लेकिन रास्ते में रूही ने जैसे ही कुल्फी वाले को देखा वो कुल्फी खाने की ज़िद करने लगी हालाँकि  ठंडी चीज़े सुहान खाने नहीं देते थे क्यूंकि रूही को जल्दी सर्दी और खांसी हो जाती थी मगर रूही के इतना ज़िद करते देख  सुहान उसे कुल्फी खाने देने को मान जाते है और कुल्फी वाले को अपने पास बुलाते है मगर कुल्फी वाले के पास इतनी भीड़ थी जिसके कारण कुल्फी वाला उनके पास नहीं आ पाते तब  रूही ने सुहान से कहा

रूही-   मैं  अभी कुल्फी लेकर आती हूँ  

इससे  पहले की सुहान कुछ कहते, रूही कुल्फी वाले के पास जा चुकी होती है और कुल्फी लेकर आ ही रही होती है एक तेज़ कार उसे टक्कर मारती है और वही रूही अपना दम तोड़ देती है  ये देखकर सुहान बहुत ज़ोर से  रूही  रूही बुलाते  हुए उसे उठाकर हॉस्पिटल लेकर जा रहा  होता है की तेज़ ट्रक सुहान को भी टक्कर मार देती है और दोनों एक दूसरे की बाँहों में अपना दम तोड़ देते है


दूर खड़ी वही कार इस पूरी घटना  को देखकर अपराधबोध से भर जाता है ये कार वामिका चड्डा की थी उसने गुस्से में रूही को जानभूझकर टक्कर मारी थी सुहान को पाने के लिए, मगर जब दिल एक ही था तो एक ही ज़िंदा भला कैसे हो सकता था

 

वामिका  ने अपनी इस गलती की सजा खुद को देते हुए अपने कार में बैठकर खाई में खुद को गिरा दिया

 

प्यार को छीना नहीं जाता वो तो बस तकदीर ने जिसकी ज़िन्दगी में लिखा उसे ही मिलेगा ख्वाहिश तो चाँद को चुने की भी होती है सुन्दर पर्वतों पर घर होने की भी होती है , तारों को छूने की भी होती है हर पल खुशियां बटोरने की भी होती है , मगर मिलता उसे, जिसकी तकदीर ने इजाज़त दे दी

 

कुछ  साल बाद सुहान की आत्मा रूही की आत्मा के साथ था मगर रूही को सुहान से दूर जन्म लेना पड़ा मगर सुहान को जन्म नहीं मिल पाया तो वो रूही का इंतज़ार करता रहा और आखिर रूही उसे मिल ही गयी दोनों एक दूसरे को देख रहे है रूही को अब सब कुछ याद था वो ज़ोर ज़ोर से रोने लगी और कहने लगी मैं नहीं रह सकती तुम्हारे बिना सुहान और उसे गले लगने की कोशिश करती है मगर वो उसे छू नहीं पाती और रोने लगती है तभी सुहान उसे दिलासा देता है मैं हूँ  तुम्हारे साथ हमेशा तभी बाहर  ज़ोर ज़ोर से आवाज़ आ रही होती है और सलोनी बाहर जाकर देखती है की एक कार का एक्सीडेंट हुआ है एक आदमी जो कार चला रहा था उसकी डेथ हुई थी जब कोई उसे हॉस्पिटल नहीं लेकर जा रहे थे तब सलोनी उस आदमी को हॉस्पिटल लेकर गयी डॉक्टर्स ने he is no more कह दिया उसके बाद उन्होंने इनके किसी रिश्तेदार को बताने का कहा  तभी सलोनी ने उस डेड बॉडी को देखा वो बिलकुल सुहान जैसा था वो ये देखकर चौक जाती है और उसे छूती है तभी उसकी बॉडी

हिलने लगती है ये देखकर वो डॉक्टर को बुलाती है तब डॉक्टर कहते है, ये कैसे हो सकता है इनकी तो डेथ हो चुकी थी ये ज़िंदा कैसे हो गए डॉक्टर ने उनका ट्रीटमेंट करके एडमिट कर दिया सलोनी अब जैसे ही वहाँ से जाने लगी तभी पीछे से आवाज़ आयी रूही….सलोनी चौकते  हुए

सलोनी  उसे देखती है, सलोनी ने पुछा

 

सलोनी - क्या कहा आपने?

मरीज़- मैं सुहान हूँ  इस आदमी की बॉडी में आ गया,  पता नहीं कैसे,  मगर अब बाहर  नहीं आ पा रहा हूँ  जब मैंने अपने जैसा चेहरा देखा तब पता ही नहीं चला कि कब इस बॉडी में चला गया शायद भगवान्  ने मुझे तुम्हारे साथ रहने का मौका दे दिया मेरी जान , और सलोनी ख़ुशी के आंसू के साथ सुहान के गले लग जाती है|

 


 

The End